Friday, 10 September 2021

*आज ही के दिन अलकायदा ने किया था अमेरिका पर हमला,* *तब से लेकर अब तक मुसलमानों के बारे में लोगो की सोच**मिनर्वा न्यूज़ की खास पहल - इतिहास के पन्नो से*

*आज ही के दिन अलकायदा ने किया था अमेरिका पर हमला,* *तब से लेकर अब तक मुसलमानों के बारे में लोगो की सोच*

*मिनर्वा न्यूज़ की खास पहल - इतिहास के पन्नो से*

आज 9/11 है । आज से ठीक बीस साल पहले अमेरिकी ट्विन टॉवर पर आतंकवादी हमला हुआ जिसमें चार हज़ार लोग मारे गए । यह शायद हमारी याद में अब तक सबसे बड़ा आतंकवादी हमला था । इस आतंकवादी हमले के बाद बुश के नेतृत्व में अमरीका ने वॉर ऑन टेरर की घोषणा कर दी । 

ट्विन टॉवर हमले के मास्टर माइंड ओसामा बिन लादेन को मारने के लिए अमरीका ने अपने मित्र देशों के साथ अफ़ग़ानिस्तान पर लाखों टन बारूद बरसाया , ओसामा तो नहीं मरा लेकिन लाखों मासूम अफ़ग़ानी इस हमले में मारे गए । क्या वो अफ़ग़ानी नागरिक भी ट्विन टॉवर के आतंकवादी हमले के दोषी थे जिन्हें अमरीकन फ़ौज ने वार ऑन टेरर की आड़ में मार दिया था ?? 

अफ़ग़ानिस्तान पर हमले का बचाव कोई यह कर कर सकता है कि वहाँ ओसामा छिपा हुआ था लेकिन इराक़ पर हमला किस लिए किया गया ?? वहाँ पर भी अमरीका और उसके मित्र देशों ने आसमान से गोला बारूद बरसाकर लाखों लोग मार दिए । वहाँ तो ओसामा छिपा हुआ नहीं था ?? 

इराक़ के बाद सीरिया , मिस्र , सूडान , यमन , लीबिया में लाखों लोगों का क़त्ल क्यों हुआ ?? कौन इस क़त्ल में शामिल था ?? ईरान पर आर्थिक प्रतिबंध क्यों लगाए गए ?? 

इन सभी देशों में एक करोड़ से ज़्यादा आम नागरिक मारे गए हैं और आज भी इन में से किसी देश में शांति नहीं है । रोज़ ही सत्ता संघर्ष और दूसरे कारण से यहाँ पर नागरिकों की हत्या हो रही है । लाखों लोग शरणार्थी बनकर दूसरे देशों में पड़े हैं । इराक़ , लीबिया जैसे देश जहां दुनिया भर से लोग रोज़गार के लिए आते थे , वहाँ के नागरिक दूसरे मुल्कों में सड़कों पर भीख माँग रहे हैं । इस सबका ज़िम्मेदार कौन है ?? 

क्या किसी एक आतंकवादी संगठन के एक आतंकवादी हमले से अमरीका को यह हक़ हासिल हो गया था कि वो इतने मुल्कों को अपनी ताक़त से बर्बाद कर दे ?? अगर इन मुल्कों की कोई सरकार मान लो उस आतंकवादी संगठन की मदद भी कर रही थी , तब भी क्या आम नागरिकों को मारने का अमेरिका को लाइसेंस मिल गया था ?? अफ़ग़ानिस्तान के अलावा ऊपर लिखे गए किसी भी देश के अल क़ायदा से कोई सीधा सम्बंध आज तक अमरीका साबित तक नहीं कर पाया है । 

आप माने या ना माने लेकिन हक़ीक़त यही है कि अफ़ग़ानिस्तान में लोग तालिबान की जीत से नहीं अमरीका की हार से ख़ुश है । पूरी दुनिया के मुसलमान अमरीका के इस जुल्म से दुःखी है , तकलीफ़ में है क्योंकि वॉर ऑन टेरर की आड़ में उसने मुस्लिम मुल्कों को तबाह करने के साथ साथ तमाम दुनिया के मुसलमानो के माथे पर भी आतंकवाद का ठप्पा लगाया है और दुनिया भर की मीडिया ने इस काम में उसकी मदद की है । 

यह अमेरिका की वॉर ऑन टेरर की मुहिम और मीडिया के प्रॉपगैंडा का ही नतीजा है जो आज भारत के मुसलमानो को भी लोग शक की नज़र से देखते हैं जबकि यहाँ के मुसलमानो का दूर दूर तक किसी भी आतंकवादी संगठन से कोई सम्बंध नहीं रहा और यहाँ के मुस्लिम आलिमों ने कई बार आतंकवाद के ख़िलाफ़ रेलिया , कॉन्फ़्रेन्स और सभाए की है तथा कई बार आतंकवाद के ख़िलाफ़ फ़तवा जारी किया है ।

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