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*तुम मुझे क्या मिले जिंदगी मिल गई : अनामिका सिंह अविरल*
*आर.जे. सिद्दीकी मिनर्वा न्यूज़*
प्रेम के पंथ की इक गली मिल गई,
तुम मुझे क्या मिले जिंदगी मिल गई.....!!
नेक विश्वास था तुम मिलोगे मुझे,
बॉह में बॉह लेकर चलोगे मुझे
थे अंधेरे घने, ढेर वीरानियां,
थी जहॉ हर तरफ सिर्फ दुश्वारियां,
साथ तेरा मिला हर खुशी मिल गई .....
मै भटकती रही प्रेम के वास्ते
थे जहॉ बंद मेरे सभी रास्ते
मैं भली थी नहीं पर न थी मनचली
मैं न थी और ही भृंग की लाडली
आपसे प्रेम की कुंडली मिल गयी ..
इस तरह सावनी दिन बिताए सजन
बारिशों ने बढ़ायी विरह की अगन।
चॉदनी रात मुझको सताती रही
प्यास प्यासे हृदय की बढ़ाती रही
प्रेम की एक कामायनी सिल गयी ...
मेरे ढलने से पहले चले आए तुम,
ले के इक रोशनी सा भले आए तुम
सारे शिकवे गिले दूर हो जाएंगे
एक दूजे के फिर नूर हो जाएंगे
फिर नयी प्रात में ज्यों कली खिल गयी ...
तुम मुझे क्या मिले जिंदगी मिल गयी ।।
अनामिका सिंह अविरल
कानपुर उत्तर प्रदेश
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