बाँकेगंज खीरी।वह किसान जो धान उगाता है वह आज समाधान उगाने के लिए प्रयासरत हैl सच कहूं तो मुझे खुद नहीं पता कि नए कृषि बिल के क्या लाभ हैं एवं कृषकों की क्या आशंकाएं हैं? यह मेरी जानकारी का अभाव हैl शायद इसका यह भी कारण है कि इस नए कृषि बिल का कहीं भी जन सूचना माध्यमों के द्वारा कहीं कोई प्रचार नहीं मिलाl क्या सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय सिर्फ उज्जवला योजना एवं जन धन योजना की प्रचार तक ही सीमित हो गया हैl किसान आंदोलन कोई दो-तीन दिन पहले नहीं शुरू हुआ है यह पिछले 2 महीनों से चल रहा है और अब इस स्तर तक पहुंचा हैlन्यूनतम समर्थन मूल्य के लिए अगर किसान आंदोलित हो पाया है तो यह बड़ी बात है क्योंकि सच तो यह है अन्य व्यवसाय/ व्यवस्थाओं/रोजगार में हालात न्यूनतम समर्थन से भी निम्नतम स्तर पर हैl शिक्षा व्यवस्था से जुड़े लोग तो मुनाफाखोर अढ़ातयो के ही चंगुल में होते हैं तो बेचारे हैं न्यूनतम समर्थन मूल्य न मिलने के बावजूद आंदोलित भी नहीं हो सकते lऔर शायद यह दशा कम से कम किसानों की दशा से और भी बुरी हैlमुझे नहीं पता कि क्या कभी किसानों के किसी वर्ग ने इस नए कृषि बिल की मांग की थी या इन्हें जबरदस्ती किसानों पर थोप दिया गयाl शायद मेरी कृषि बिल संबंधित सभी जिज्ञासाओं के जवाब अगर मैं इंटरनेट पर ढूंढता तो मिल जाते हैं लेकिन क्या किसान भी अपने सवालों का जवाब अब इंटरनेट पर ढूंढेगा एवं सरकारी सूचना तंत्र सिर्फ अपनी डफली और अपना राग पिटेगाl
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