Friday, 17 September 2021

*गांव में नहीं एक भी मुसलमान का घर, फिर भी मस्जिद में गूंजती है पांचों वक्त अज़ान**आर.जे. सिद्दीकी मिनर्वा न्यूज़*

*गांव में नहीं एक भी मुसलमान का घर, फिर भी मस्जिद में गूंजती है पांचों वक्त अज़ान*

*आर.जे. सिद्दीकी मिनर्वा न्यूज़*
बिहार के नालंदा जिले का माड़ी गांव ने देश के हिन्दू-मुसलमानों के सामने भाईचारे की बड़ी मिसाल पेश की है। जिससे हर देशवासी को सबक लेना चाहिए। दरअसल, गांव का हिन्दू समुदाय बीते 80 सालों से यहां स्थित मस्जिद और दरगाह की देखभाल कर रहा है। बावजूद गांव में एक भी मुसलमान का घर नहीं है।
दरअसल, 1942 के सांप्र’दायिक दंगों के बाद गांव के सभी मुस्लिम परिवार पलायन कर गए थे। जिसके बाद से ही मस्जिद वीरान थी और दरगाह में कोई दिया जलाने वाला नहीं था। लेकिन गांव वालों ने मस्जिद और दरगाह की देखभाल की। इतना ही नहीं मस्जिद में पांचों वक्त अज़ान का भी इंतजाम किया।
गांव वाले हर रोज मस्जिद की सफाई करते है। साथ ही अजान के वक्त मस्जिद में माइक पर पेन ड्राइव लगा देते है। जिससे मस्जिद में पांचों वक्त अज़ान गूँजती है। गाँव में एक दरगाह भी है।  गांव वाले  दरगाह को मंदिर का ही स्थान देते है। त्यौहारों पर मंदिर के साथ दरगाह पर भी मत्था टेकते है।
गांव वालों का कहना है कि गांव में पहले हमेशा बाढ़ आती थी। इस दौरान एक मुस्लिम बुजुर्ग हज रत इस्माइल गांव आए थे। उनके आने के बाद गांव में कभी कोई तबाही नहीं आई। उनके निधन के बाद ग्रामीणों ने मस्जिद के पास ही उन्हें द’फना दिया।
गांव के जानकी पंडित आईएएनएस से कहते हैं, “मस्जिद में नियम के मुताबिक सुबह और शाम सफाई की जाती है, जिसका दायित्च यहीं के लोग निभाते हैं। गांव में कभी भी किसी परिवार के घर अशुभ होता है तब वह परिवार मजार की ओर ही दुआ मांगने पहुंचता है।”

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