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आज की कविता राजस्थान की माही जी की।
मॉं ( Mamma )
जिंदगी की किताब में सूकूं लिखना था...!
मैंने मॉं लिख दिया...!!
फ़िक्र करना सिखाती है मॉं,
बरकत करना सिखाती है मॉं।
वो इस क़दर मोहब्बत करती है,
हमारी खुशियों की खातिर जान लूटाती है मॉं।।
मेरा वजूद मॉं की मोहब्बत है...!
मॉं की बांहों में जन्नत है...!!
मॉं तो मॉं होती है,
मॉं के जैसा इस दुनिया में कोई भी नहीं है।
मॉं को रब ने बनाया है मगर,
मॉं का किरदार देखा ,
लगा ऐसा तो खुद खुदा भी नहीं है।।
- Mahi ✍️
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